(Original Post : Timeboxing, October 19th, 2004 by Steve Pavlina)
'समय-सीमा' तय करना, समय के मैनेजमेंट का एक ऐसा तरीका है जिसका उपयोग मैं अक्सर करता हूँ| मैंने इसे, सबसे पहले सॉफ्टवेयर के निर्माण के दौरान सीखा था| मान लीजिए कि आपको, अपने एक नए उत्पाद(product) को, बाजार में उतारने की एक तय समय-सीमा मिली हुई है, जैसेकि 'इनकम-टैक्स का हिसाब लगाने वाले' एक सॉफ्टवेयर का सालाना अपग्रेड(सुधार, upgrade)| आपको हर हाल में, एक निश्चित तारीख तक नया अपग्रेड तैयार करना ही होगा| तो फिर आप अपने, विकास-चक्र(development cycle) के लिए शायद 'समय-सीमा तय करने' के तरीके का उपयोग करेंगे, दूसरे शब्दों में आप एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने काम को, बेहतर से बेहतर तरीके से, करने का प्रयास करेंगे| आप इसमें कौन-कौन सी नई खूबियाँ जोड़ पाएंगे, यह पूरी तरह से उपलब्ध समय पर निर्भर करेगा| अपने टाईम-टेबल को बदलने का सवाल ही नहीं उठता, इसलिए अगर आप पिछड जाते है तो आपको खूबियों में कटौती करनी ही होगी|
अपने खुद के कार्यों को संभालने(manage) के समय, 'समय-सीमा' निर्धारित करने की तकनीक मददगार साबित हो सकती है| मैं मुख्य रूप से इसका उपयोग दो अलग-अलग परिस्थितियों में करता हूँ|